उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में 20 जनवरी 2026 को एक अंतरधार्मिक विवाह विधि अनुसार सम्पन्न हुआ। एक बालिग मुस्लिम युवती और शुभम नामक हिंदू युवक ने अपनी स्वतंत्र इच्छा और सहमति से वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। विवाह धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न किया गया तथा बाद में न्यायालय में आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ पूरी कर इसे विधिक मान्यता दिलाई गई।
यह विवाह सामाजिक समरसता और संवैधानिक अधिकारों के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
आर्य समाज मंदिर में वैदिक रीति से सम्पन्न हुआ विवाह
सबसे पहले दोनों ने आर्य समाज मंदिर में वैदिक विधि-विधान के साथ विवाह किया। विवाह के दौरान पारंपरिक मंत्रोच्चार, हवन संस्कार और सात वचनों की प्रक्रिया पूर्ण की गई।
विवाह प्रमाण पत्र में निम्न विवरण दर्ज हैं:
- विवाह तिथि: 18-01-2026
- पंजीकरण संख्या: 254/1904
- वर एवं वधू का पूर्ण विवरण
- गवाहों के हस्ताक्षर
- मंदिर की आधिकारिक मोहर

आर्य समाज पद्धति के अनुसार विवाह पूर्ण होने के बाद प्रमाण पत्र जारी किया गया, जो वैधानिक दस्तावेज के रूप में मान्य होता है।
विवाह की प्रमुख रस्में
🌸 जयमाला
वर-वधू ने एक-दूसरे को फूलों की माला पहनाकर वैवाहिक संबंध स्वीकार किया।
🔥 हवन एवं मंत्रोच्चार
हवन कुंड के समक्ष वैदिक मंत्रों के साथ विवाह की धार्मिक प्रक्रिया सम्पन्न हुई।
🙏 आशीर्वाद
दोनों ने मंदिर में स्थापित प्रतिमा के समक्ष हाथ जोड़कर आशीर्वाद लिया।

इन सभी रस्मों के दौरान पारंपरिक वेशभूषा धारण की गई, जिससे विवाह पूर्णतः धार्मिक विधि से सम्पन्न हुआ।
न्यायालय में पूरी की गई कानूनी प्रक्रिया
विवाह के बाद दोनों पक्षों ने कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनाई। इसमें निम्न चरण शामिल रहे:
- आयु प्रमाण प्रस्तुत (लड़का 21+ एवं लड़की 18+)
- स्वेच्छा से विवाह की लिखित सहमति
- पहचान एवं निवास प्रमाण पत्र
- दस्तावेजों का सत्यापन
- विधिक औपचारिकताओं की पूर्ति
सभी प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद विवाह को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त हुई।
कानूनी सहयोग
इस विवाह की समस्त विधिक प्रक्रिया में
एडवोकेट कुलदीप शर्मा (मुरादाबाद) द्वारा कानूनी मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान की गई।
📞 संपर्क: 9756646516
विवाह से संबंधित दस्तावेजों की तैयारी, सत्यापन एवं न्यायालयीन प्रक्रिया विधि अनुसार पूर्ण कराई गई।
कानूनी दृष्टिकोण
भारतीय संविधान प्रत्येक बालिग नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार प्रदान करता है। यदि दोनों पक्ष:
- निर्धारित आयु पूर्ण कर चुके हों
- स्वेच्छा से विवाह कर रहे हों
- किसी दबाव में न हों
तो उनका विवाह कानून की दृष्टि से वैध माना जाता है।
सामाजिक संदेश
यह विवाह दर्शाता है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकार सर्वोपरि हैं। अंतरधार्मिक विवाह आपसी समझ, सम्मान और समानता पर आधारित होते हैं। समाज में जागरूकता और कानून की जानकारी से ऐसे मामलों को शांतिपूर्ण एवं विधिक तरीके से सम्पन्न किया जा सकता है।
निष्कर्ष
20 जनवरी 2026 को सम्पन्न यह विवाह धार्मिक एवं कानूनी दोनों दृष्टि से पूर्ण रूप से वैध है। आर्य समाज मंदिर में सम्पन्न धार्मिक विधि और न्यायालय में पूरी की गई कानूनी प्रक्रिया के बाद अब दोनों विधिक रूप से पति-पत्नी हैं।

